हैदराबाद का है कुछ अलग अंदाज़
इस शहर ने पहना है मोतियों का ताज
जहां नुक्कड़ कि दुकान पर बैठा है चाचा करीम
लोग जहां आते खाने सेंवई और हलीम
यहाँ के समोसों कि बात है निराली
बस साथ में हो अगर ईरानी चाय, एक प्याली
गोलकोंडा फोर्ट का अंदाज़ है कुछ निराला
समय कि धूल ने जिसे कर दिया है काला
मगर फिर भी उसमे है कुछ बात
जगमगा उठता है जब हो जाये रात
कहता है अपनी ही ज़ुबानी
सदियों पुरानी अपनी कहानी
इस शहर ने पहना है मोतियों का ताज
जहां नुक्कड़ कि दुकान पर बैठा है चाचा करीम
लोग जहां आते खाने सेंवई और हलीम
यहाँ के समोसों कि बात है निराली
बस साथ में हो अगर ईरानी चाय, एक प्याली
गोलकोंडा फोर्ट का अंदाज़ है कुछ निराला
समय कि धूल ने जिसे कर दिया है काला
मगर फिर भी उसमे है कुछ बात
जगमगा उठता है जब हो जाये रात
कहता है अपनी ही ज़ुबानी
सदियों पुरानी अपनी कहानी
बड़ा दिलचस्प है यहाँ का चिड़ियाघर
जहां सुनाई देते हैं परिंदों के अनगिनत स्वर
यहाँ रहता है जंगल का राजा
जो बजा सकता है किसी का भी बाजा
इसलिए ए मेरे हबीब
न जाना उसके क़रीब
यहाँ हिप्पो है अपनी ही मस्ती में
जिसे घेरा है लोगों कि बस्ती ने
पानी में तैरते दिखते अनगिनत मगर
लोग हिचकते जाने जिनकी डगर
सीने ताने जहां खड़ा है चारमिनार
पास ही में बस्ता है यहाँ चूड़ी बाज़ार
यहाँ लोगों का कुछ अलग है अंदाज़
सुबह शाम यहाँ पढ़ी जाती है नमाज़
सर झुका के वे कहते अल्लाह-हु-अकबर
इस जहां से हो कर बेख़बर
अब आई ईट स्ट्रीट कि बारी
यहाँ कि हवा है कुछ न्यारी
तरह तरह के पकवान यहाँ परोसे जाते
तरह तरह के लोग यहाँ आते और खाते
जहां होती है एक तरफ हुसैन सागर में बोटिंग
वहीँ पास में वाटर पार्क में होती है फ्लोटिंग
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